“जितने लोकल होंगे उतने ही ग्लोबल होंगे, लखनऊ के लिए यह फेस्टिवल बेहद ज़रूरी है।”

“जितने लोकल होंगे उतने ही ग्लोबल होंगे, लखनऊ के लिए यह फेस्टिवल बेहद ज़रूरी है।”
“इस तरह के आयोजन मेट्रो शहरों से बाहर लखनऊ में हो रहे हैं, यह बड़ी बात है। यह निरंतर यूँ ही चलता रहे यही दुआ है।”
“मैं बहुत खुश हूं लखनऊ की सरज़मीं पर आकर, और शान-ए-अवध इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में शामिल होना मेरे लिए खुशी की बात है।”
“बिना किसी सरकारी सहायता, बिना किसी कॉर्पोरेट की सहायता के इस तरह का आयोजन लखनऊ जैसे शहर में गत 6 वर्षों से चलते रहना एक बड़ी बात है,
अवध आर्ट सोसाइटी और अश्वनी समेत सभी सदस्यों को बहुत बहुत शुभकामना ।”